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विकास दुवे के बाद अब इस कुख्यात की पत्नी को सता रहा एन्काउंटर का खौफ…..

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पश्चिम उप्र के कुख्यात व मेरठ के करनावल गांव निवासी उधम सिंह की पत्नी ने अपने पति की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। जिसमें उसने अपने पति के फर्जी एनकांउटर का अंदेशा जताया है। दरअसल, प्रदेश पुलिस की टॉप 25 बदमाशों में उधम सिंह का नाम भी शामिल किया गया है। उधम सिंह की पत्नी का कहना है कि पेशी पर लाते वक्त उसके पति का पुलिस एनकाउंटर कर सकती है। वकील ने एसटीएफ पर आरोप लगाए हैं कि पहले भी उधम को मारने की कोशिश की जा चुकी है।

बता दें कि उधम सिंह की पत्नी रोहटा थाना क्षेत्र के करनावल गांव की चेयरमैन भी है। विकास दुबे एनकाउंटर के बाद पुलिस ने 25 कुख्यात बदमाशों की लिस्ट जारी की थी। कुख्यात बदमाशों में मेरठ के योगेश भदौड़ा, उधम सिंह, और बदन सिंह बद्दो के नाम शामिल हैं। उधम सिंह 9 साल से आजमगढ़ जेल में बंद है। इस संबंध में मेरठ के एसएसपी, डीजीपी और मानवाधिकार आयोग को याचिका का एक पत्र भेजा गया है। बताया गया कि विकास दुबे एनकाउंटर के बाद पुलिस पूरे प्रदेश में बदमाशों की लिस्ट तैयार कर रही है और इसमें पति का नाम डाला गया है। इस मामले में किसी भी तरह का फर्जी एनकाउंटर नहीं होने की मांग की गई है।

उधम सिंह की पत्नी पुष्पा देवी ने जो पत्र पुलिस अधिकारियों को भेजा हैं, उसमें लिखा है कि उसके पति पिछले नौ साल से जेल में बंद हैं। उनका अब अपराध से कोई वास्ता नहीं है। इतना ही नहीं, ये भी लिखा गया कि कई बार उनके पति उधम सिंह का नाम बेवजह सुर्खियों में लाया गया है, जबकि उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उनके पति पर 11 अक्टूबर 2012 में गाजियाबाद कोर्ट में कातिलाना हमला किया गया था। इसका केस कोर्ट में चल रहा है।

‘किठौर में दी थी एसटीएफ ने धमकी’

पुष्पा देवी ने पत्र में लिखा है कि दो दिसंबर 2019 को उनके पति को पेशी पर मेरठ लाया गया था। वापसी में एसटीएफ मेरठ की टीम ने पुलिस की गाड़ी को किठौर में रोका था। यहां पर उधम सिंह को फर्जी एनकाउंटर की धमकी दी गई थी। उस समय इस संबंध में पुलिस अधिकारियों और कोर्ट से शिकायत की गई थी। कोर्ट ने इस प्रकरण में हस्तक्षेप भी किया था। पुष्पा ने आशंका जताई कि पुलिस उधम का आजमगढ़ जेल से मेरठ पेशी पर आते-जाते समय पुलिस अभिरक्षा में ही एनकाउंटर कर सकती है। इस संबंध में सुरक्षा बढ़ाने और गलत एनकाउंटर नहीं करने की मांग की गई है, साथ ही इस मामले में मानवाधिकार आयोग और सुप्रीम कोर्ट को भी यह पत्र भेजा गया है।